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पश्चिम बंगाल में नौशाद सिद्दीकी ने किया बड़ा ऐलान, कहा- 'ISF 33 सीटों पर लड़ेगी विधानसभा चुनाव'

 Published : Mar 21, 2026 10:31 am IST,  Updated : Mar 21, 2026 10:31 am IST

नौशाद सिद्दीकी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी ISF लेफ्ट फ्रंट के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 33 सीटों पर चुनौती पेश करेगी। माना जा रहा है कि यह गठबंधन ममता बनर्जी की पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।

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ISF नेता नौशाद सिद्दीकी। Image Source : ANI

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक पीरजादा नौशाद सिद्दीकी ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन में कुल 33 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इनमें से 29 सीटों का फैसला लगभग हो चुका है और बाकी पर अंतिम बातचीत चल रही है। ANI की खबर के मुताबिक सिद्दीकी ने कहा, 'अभी तक हमने 33 सीटें तय कर ली हैं और लेफ्ट फ्रंट के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। 29 सीटें फाइनल हो गई हैं। हमने साफ कर दिया था कि हम 4 सीटों पर समझौता नहीं कर सकते। हम 294 में से 33 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।'

तृणमूल के लिए चुनौती बन सकती है पीरजादा की पार्टी

बता दें कि पीरजादा की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं और चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को होंगे जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। माना जा रहा है कि उनकी पार्टी कई इलाकों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को ही अपनी पार्टी का मैनिफेस्टो जारी किया। इसका नाम '10 प्रतिज्ञा' रखा गया है। यह घोषणा-पत्र राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित है।

तृणमूल और बीजेपी के बीच हो सकता है दिलचस्प मुकाबला

विपक्ष ने ममता बनर्जी के इस मैनिफेस्टो को 'अवास्तविक' करार दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ISF और लेफ्ट फ्रंट का गठबंधन तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबले को और रोचक बना सकता है। विधानसभा चुनावों में मुख्य टक्कर भी इन्हीं दोनों दलों के बीच मानी जा रही है। ISF पहले भी 2021 के चुनाव में लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन में उतरी थी और भंगर सीट जीतकर उसके नेता विधानसभा में पहुंचे थे। अब देखना है कि 2026 में यह गठबंधन कितना असरदार साबित होता है और किस स्तर पर सूबे की सियासत में अपनी पैठ बना पाता है।

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